Lecture by Prof. Shrinivasa Varakhedi at Bharatiya Anusandhana Paddhati Winter School 2025
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Date
2025-12-08
Journal Title
Journal ISSN
Volume Title
Publisher
Central Sanskrit University, New Delhi
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Abstract
Description
This event was organized at Karnataka Samskrit University from 4th to 10th December 2025 as part of the Bharatiya Anusandhana Paddhati Winter School. It was jointly organized by Karnataka Samskrit University, Central Sanskrit University, and Veda Vijnana Shodha Samsthana. The programme commenced with a dignified inaugural ceremony and aimed at promoting in-depth study, scholarly dialogue, and the revival of traditional Indian research methodologies within the framework of Sanskrit and Indian Knowledge Systems. Scholars, academicians, and research students from various institutions across the country actively participated in the event.
यह कार्यक्रम कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय में 4–10 दिसंबर 2025 के दौरान आयोजित भारतीय अनुसंधान पद्धति विंटर स्कूल के अंतर्गत गरिमामय उद्घाटन समारोह के साथ प्रारंभ हुआ। यह विंटर स्कूल कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा वेद विज्ञान शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस शैक्षणिक आयोजन का उद्देश्य संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित पारंपरिक अनुसंधान पद्धतियों के गहन अध्ययन, विमर्श एवं पुनर्स्थापन को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न संस्थानों से विद्वानों, अध्येताओं एवं शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।
यह कार्यक्रम कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय में 4–10 दिसंबर 2025 के दौरान आयोजित भारतीय अनुसंधान पद्धति विंटर स्कूल के अंतर्गत गरिमामय उद्घाटन समारोह के साथ प्रारंभ हुआ। यह विंटर स्कूल कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा वेद विज्ञान शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस शैक्षणिक आयोजन का उद्देश्य संस्कृत तथा भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित पारंपरिक अनुसंधान पद्धतियों के गहन अध्ययन, विमर्श एवं पुनर्स्थापन को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में देश के विभिन्न संस्थानों से विद्वानों, अध्येताओं एवं शोधार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।
