भारत की संस्कृति, सत्ता और भविष्य—पाञ्चजन्य का 79वां स्थापना दिवस
Date
2026-01-30
Authors
Journal Title
Journal ISSN
Volume Title
Publisher
Central Sanskrit University, New Delhi
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Abstract
Description
This event was organized on the occasion of the 79th Foundation Day of Panchjanya and featured a special dialogue between Prof. Shrinivasa Varakhedi, Hon'ble Vice-Chancellor of Central Sanskrit University, and Anshu Ji. The discussion focused on India’s culture, education, and future vision, highlighting the principle of “Vasudhaiva Kutumbakam” as a foundation of India’s global outlook. Prof. Varakhedi emphasized holistic education, the relevance of NEP 2020, self-awareness, social responsibility, youth discipline, ethical use of Artificial Intelligence, and the growing global relevance of Sanskrit and Indian Knowledge Systems in shaping a confident and self-reliant India.
यह कार्यक्रम पाञ्चजन्य के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेडी और अंशु जी के बीच एक विशेष संवाद हुआ। इस चर्चा का केंद्र भारत की संस्कृति, शिक्षा और भविष्य की दृष्टि रहा, जिसमें “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत को भारत की वैश्विक सोच का आधार बताया गया। प्रोफेसर वरखेडी ने समग्र शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रासंगिकता, आत्मबोध, सामाजिक दायित्व, युवा अनुशासन, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग तथा संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा की बढ़ती वैश्विक महत्ता पर बल दिया, जो आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक है।
यह कार्यक्रम पाञ्चजन्य के 79वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रोफेसर श्रीनिवास वरखेडी और अंशु जी के बीच एक विशेष संवाद हुआ। इस चर्चा का केंद्र भारत की संस्कृति, शिक्षा और भविष्य की दृष्टि रहा, जिसमें “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत को भारत की वैश्विक सोच का आधार बताया गया। प्रोफेसर वरखेडी ने समग्र शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रासंगिकता, आत्मबोध, सामाजिक दायित्व, युवा अनुशासन, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग तथा संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा की बढ़ती वैश्विक महत्ता पर बल दिया, जो आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक है।
