संस्कृत अभिलेख गौरवशाली इतिहास के प्रामाणिक दस्तावेज : प्रो वरखेड़ी
Date
2026-07-07
Authors
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Publisher
संस्कृत पत्रिका
Sanskrit Patrika
Sanskrit Patrika
Abstract
Description
This news article highlights the keynote address of Prof. Shrinivasa Varakhedi, Hon'ble Vice-Chancellor of Central Sanskrit University, at the National Seminar on Sanskrit Epigraphy organized by Kanchi Kamakoti Peeth. He emphasized that Sanskrit inscriptions are authentic historical documents preserving India's rich cultural, social, and civilizational heritage. Stressing their immense value for historical research, he called for the systematic preservation, digitization, documentation, and scholarly interpretation of epigraphic records. He also advocated interdisciplinary collaboration among historians, archaeologists, linguists, and researchers to promote evidence-based historical studies and ensure the preservation of India's invaluable epigraphic legacy for future generations.
यह समाचार लेख कांची कामकोटि पीठ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संस्कृत अभिलेख एपिग्राफी संगोष्ठी में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के मुख्य उद्बोधन को प्रस्तुत करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संस्कृत अभिलेख भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, सामाजिक एवं सभ्यतागत विरासत को संरक्षित रखने वाले प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। ऐतिहासिक अनुसंधान में उनके अत्यधिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने अभिलेखीय अभिलेखों के व्यवस्थित संरक्षण, डिजिटलीकरण, प्रलेखन तथा विद्वत्तापूर्ण व्याख्या का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, भाषाविदों तथा शोधकर्ताओं के बीच अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया, ताकि साक्ष्य-आधारित ऐतिहासिक अध्ययन को प्रोत्साहन मिले और भारत की अमूल्य अभिलेखीय धरोहर का संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए सुनिश्चित किया जा सके।
यह समाचार लेख कांची कामकोटि पीठ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संस्कृत अभिलेख एपिग्राफी संगोष्ठी में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के मुख्य उद्बोधन को प्रस्तुत करता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संस्कृत अभिलेख भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, सामाजिक एवं सभ्यतागत विरासत को संरक्षित रखने वाले प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज हैं। ऐतिहासिक अनुसंधान में उनके अत्यधिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने अभिलेखीय अभिलेखों के व्यवस्थित संरक्षण, डिजिटलीकरण, प्रलेखन तथा विद्वत्तापूर्ण व्याख्या का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, भाषाविदों तथा शोधकर्ताओं के बीच अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया, ताकि साक्ष्य-आधारित ऐतिहासिक अध्ययन को प्रोत्साहन मिले और भारत की अमूल्य अभिलेखीय धरोहर का संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए सुनिश्चित किया जा सके।
Keywords
कांची कामकोटि पीठ, भारतीय ज्ञान परंपरा, चैन्नई, संस्कृत विरासत, अभिलेखीय, Sanskrit Epigraphy, Kanchi Kamakoti Peeth, Digitization
