ज्ञानभारतम् अभियान में ज्ञान संरक्षणोपाय तथा चुनौतियाँ : एक व्याख्यान
Date
2026-02-12
Journal Title
Journal ISSN
Volume Title
Publisher
Central Sanskrit University, New Delhi
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Abstract
Description
This event was organized to present a lecture on the Gyan Bharatam Mission, a national initiative focused on preserving and promoting Indian Knowledge Systems. The lecture highlighted the importance of safeguarding ancient manuscripts and traditional knowledge for cultural continuity and national development. It emphasized integrating oral, written, and digital preservation methods to ensure accessibility for future generations. The speakers also discussed the responsible use of Artificial Intelligence with human supervision to maintain authenticity and context. The event encouraged scholars and institutions to collaborate in strengthening preservation efforts and connecting traditional wisdom with modern academic and technological frameworks nationwide goals effectively.
यह कार्यक्रम ज्ञान भारतम् मिशन पर व्याख्यान प्रस्तुत करने के लिए आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन करना है। व्याख्यान में प्राचीन पांडुलिपियों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के महत्व पर बल दिया गया, ताकि सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय विकास सुनिश्चित हो सके। इसमें मौखिक, लिखित और डिजिटल संरक्षण विधियों के समन्वय पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग के साथ मानवीय निगरानी की आवश्यकता को भी रेखांकित किया तथा संस्थानों और विद्वानों से संयुक्त प्रयास का आह्वान किया।
यह कार्यक्रम ज्ञान भारतम् मिशन पर व्याख्यान प्रस्तुत करने के लिए आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन करना है। व्याख्यान में प्राचीन पांडुलिपियों और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के महत्व पर बल दिया गया, ताकि सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय विकास सुनिश्चित हो सके। इसमें मौखिक, लिखित और डिजिटल संरक्षण विधियों के समन्वय पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग के साथ मानवीय निगरानी की आवश्यकता को भी रेखांकित किया तथा संस्थानों और विद्वानों से संयुक्त प्रयास का आह्वान किया।
