Panel Discussion on Human Values in Indian Literary Creations: Texts, Territory and the Narrative
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Date
2026-04-26
Journal Title
Journal ISSN
Volume Title
Publisher
Central Sanskrit University, New Delhi
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Abstract
Description
This panel discussion was organized to examine Human Values in Indian Literary Creations through insights from distinguished scholars and writers. The session highlighted that literature acts both as a mirror of society and a guide for moral direction. It emphasized the growing conflict between traditional values and modern materialism, where price is often mistaken for true value. The discussion stressed the role of folk traditions and storytelling in preserving ethical values and noted their decline in today’s generation. It also underlined the Indian perspective of harmony between humans and nature, calling for a revival of cultural and literary traditions.
यह पैनल चर्चा भारतीय साहित्य में मानवीय मूल्य विषय पर प्रतिष्ठित विद्वानों और लेखकों के विचारों को प्रस्तुत करने के लिए आयोजित की गई थी। इस सत्र में बताया गया कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ नैतिक दिशा भी प्रदान करता है। इसमें पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक भौतिकवाद के बीच बढ़ते संघर्ष पर प्रकाश डाला गया, जहाँ लोग कीमत को ही वास्तविक मूल्य समझने लगे हैं। चर्चा में लोक परंपराओं और कहानी-कथन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया, जो नैतिक मूल्यों को संरक्षित करती थीं, लेकिन आज उनकी कमी देखी जा रही है। साथ ही भारतीय दृष्टिकोण में मानव और प्रकृति के संतुलन पर जोर देते हुए सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपराओं के पुनर्जीवन की आवश्यकता बताई गई।
यह पैनल चर्चा भारतीय साहित्य में मानवीय मूल्य विषय पर प्रतिष्ठित विद्वानों और लेखकों के विचारों को प्रस्तुत करने के लिए आयोजित की गई थी। इस सत्र में बताया गया कि साहित्य समाज का दर्पण होने के साथ-साथ नैतिक दिशा भी प्रदान करता है। इसमें पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक भौतिकवाद के बीच बढ़ते संघर्ष पर प्रकाश डाला गया, जहाँ लोग कीमत को ही वास्तविक मूल्य समझने लगे हैं। चर्चा में लोक परंपराओं और कहानी-कथन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया, जो नैतिक मूल्यों को संरक्षित करती थीं, लेकिन आज उनकी कमी देखी जा रही है। साथ ही भारतीय दृष्टिकोण में मानव और प्रकृति के संतुलन पर जोर देते हुए सांस्कृतिक और साहित्यिक परंपराओं के पुनर्जीवन की आवश्यकता बताई गई।
