Never Call Sanskrit a Dead Language! Breaking the Myths about Sanskrit — Prof. Shrinivasa Varakhedi | Podcast with Pesu Tamizha Pesu
Date
2025
Authors
Journal Title
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Volume Title
Publisher
Pesu Tamizha Pesu Channel
Abstract
Description
This podcast titled "Never Call Sanskrit a Dead Language! Breaking the Myths about Sanskrit" features Prof. Shrinivasa Varakhedi, Vice Chancellor of Central Sanskrit University, in conversation with the Pesu Tamizha Pesu Youtube Channel. It explores the significance and continued relevance of Sanskrit in the modern world. Topics include the vast knowledge stored in Sanskrit literature, the ease of learning spoken Sanskrit, shifting public perceptions, cultural and employment opportunities for Sanskrit learners, and efforts by the government and institutions to promote and integrate Sanskrit into contemporary education. The discussion emphasizes Sanskrit as a living language, adaptable to modern contexts and crucial for India's cultural and intellectual future.
यह पॉडकास्ट, जिसका शीर्षक है "संस्कृत को कभी मृत भाषा न कहें! संस्कृत से जुड़े मिथकों का खंडन", केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी और Pesu Tamizha Pesu यूट्यूब चैनल के बीच संवाद पर आधारित है। इसमें आधुनिक दुनिया में संस्कृत के महत्व और इसकी निरंतर प्रासंगिकता पर चर्चा की गई है। इस बातचीत में संस्कृत साहित्य में निहित विशाल ज्ञान, बोली जाने वाली संस्कृत को सीखने की सरलता, जनता की बदलती सोच, संस्कृत शिक्षार्थियों के लिए सांस्कृतिक और रोजगार की संभावनाएं, तथा सरकार एवं संस्थानों द्वारा संस्कृत को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करने के प्रयास जैसे विषयों को शामिल किया गया है। यह संवाद संस्कृत को एक जीवंत, लचीली और आधुनिक संदर्भों के अनुरूप भाषा के रूप में प्रस्तुत करता है, जो भारत के सांस्कृतिक और बौद्धिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह पॉडकास्ट, जिसका शीर्षक है "संस्कृत को कभी मृत भाषा न कहें! संस्कृत से जुड़े मिथकों का खंडन", केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी और Pesu Tamizha Pesu यूट्यूब चैनल के बीच संवाद पर आधारित है। इसमें आधुनिक दुनिया में संस्कृत के महत्व और इसकी निरंतर प्रासंगिकता पर चर्चा की गई है। इस बातचीत में संस्कृत साहित्य में निहित विशाल ज्ञान, बोली जाने वाली संस्कृत को सीखने की सरलता, जनता की बदलती सोच, संस्कृत शिक्षार्थियों के लिए सांस्कृतिक और रोजगार की संभावनाएं, तथा सरकार एवं संस्थानों द्वारा संस्कृत को आधुनिक शिक्षा प्रणाली में शामिल करने के प्रयास जैसे विषयों को शामिल किया गया है। यह संवाद संस्कृत को एक जीवंत, लचीली और आधुनिक संदर्भों के अनुरूप भाषा के रूप में प्रस्तुत करता है, जो भारत के सांस्कृतिक और बौद्धिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।