संस्कृत संवर्धन को मिलेगी नई गति केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में 66.20 करोड़ के बजट को मंजूरी 37 वीं ग्रांट-इन-एड समिति की बैठक में छात्रवृत्ति
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2026-06-25
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खबरोंं की दुनिया
Khabaron Ki Duniya
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This news article highlights a review and planning meeting held at Central Sanskrit University to strengthen Sanskrit promotion, training, research, and digital outreach initiatives across India. During the 37th Grant-in-Aid Committee meeting, a budget of ₹66.20 crore was approved to support scholarships, traditional Sanskrit institutions, research fellowships, seminars, workshops, digital learning resources, and publication projects. Hon’ble Vice-Chancellor Prof. Shrinivasa Varakhedi chaired the meeting and emphasized the importance of preserving Sanskrit while adopting modern technologies and digital platforms. The approved initiatives aim to enhance the quality of Sanskrit education, expand research opportunities, promote digital content development, and ensure the wider dissemination of Sanskrit language, literature, and Indian Knowledge Systems.
यह समाचार लेख केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित 37वीं ग्रांट-इन-एड समिति की बैठक पर आधारित है, जिसमें संस्कृत भाषा के संवर्धन, शोध, प्रशिक्षण तथा डिजिटल प्रसार से संबंधित विभिन्न योजनाओं की व्यापक समीक्षा और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में संस्कृत शिक्षा, छात्रवृत्ति, शोध परियोजनाओं, फेलोशिप, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा डिजिटल सामग्री के विकास के लिए ₹66.20 करोड़ के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई। कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संस्कृत को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जोड़ते हुए उसकी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। यह पहल संस्कृत शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यापक प्रसार के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
यह समाचार लेख केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित 37वीं ग्रांट-इन-एड समिति की बैठक पर आधारित है, जिसमें संस्कृत भाषा के संवर्धन, शोध, प्रशिक्षण तथा डिजिटल प्रसार से संबंधित विभिन्न योजनाओं की व्यापक समीक्षा और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में संस्कृत शिक्षा, छात्रवृत्ति, शोध परियोजनाओं, फेलोशिप, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं तथा डिजिटल सामग्री के विकास के लिए ₹66.20 करोड़ के बजट को स्वीकृति प्रदान की गई। कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में संस्कृत को आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से जोड़ते हुए उसकी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। यह पहल संस्कृत शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के व्यापक प्रसार के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Keywords
ग्रांट-इन-एड, संस्कृत शिक्षा, शोध फेलोशिप, भारतीय ज्ञान परंपरा, Grant-in-Aid Committee, Indian Knowledge Systems
